"Sarokaar" means "concern" and we are concern for the betterment of underserved sections of society that require intervention. Sarokaar registered in Uttarakhand (India) as NGO works to improve living, education, cultural activities, health, sports, environment etc. and helps in protecting human values. Our drive for betterment commences group wise from the interior parts of hilly Uttarakhand with a specific task in a time with an aim of conquering over ironies and lurches of inhabitants' living there. Individuals from diverse fields in our Board Members Committee look after different facets of the organization. A process of bringing expertise of board members to the table and then use it with mutual decision for the betterment of people's life according to organizational policies and plans motivates everyone to work in a group with dedication. Members oversee budgets, finance and human resource development process while some of them also help in developing strategies for communication and resource mobilization. Many of them are actively involved as visionary mentors and guides.
सरोकार के मायने हैं चिंता के साथ लगाव और हमारी चिंता एवं लगाव समाज के उस तबके के जीवन यापन में सुधार के लिए है जिसके लिए तुरंत हस्तक्षेप की आवश्यकता है. 'सरोकार' उत्तराखण्ड (भारत) में एक एन. जी. ओ. के रूप में पंजीकृत है और वहां के लोगो के रहन सहन, शिक्षा व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्य कलाप, स्वास्थ्य सेवाओं, खेलों, पर्यावरण आदि में सुधार के लिए कार्यरत है और मानव मूल्यों की रक्षा के लिए सहायता करता है. हमारे जन सरोकारी दल सर्व प्रथम दुर्गम एवं अंदरूनी पहाड़ी क्षेत्र से अपने सुधार के कार्यों को शुरू कर एक बार में एक मुद्दे को लेकर वहां के वासियों की विडम्बनाओं और बिना-प्रगति की लड़खड़ाहट को समझ कर उनके निराकरण के लिए कटिवद्धता से प्रयास करते हैं.हमारे संगठन के निदेशक मंडल के सदस्य जो विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं, अपने-अपने अनुभवों के मुताबिक नीति बनाकर उसे कार्यरूप में परिणित करने के लिए वित्त जुटाकर मानव संसाधन विकास हेतु पूर्णतया संगठन के सुचारू रूप के सञ्चालन में जनता के लिए समर्पित हैं जिससे संगठन के आतंरिक और बाह्य लोकतांत्रिक समन्वयता के प्रारूप को मजबूती मिलती है. कुछ दूरदर्शी सदस्यगण जनसेवा की कार्य शैली की रणनीति में सुधार कार्यो में लगे हैं तो कुछ संचार माध्यम से संसाधनों की व्यवस्था में और वरिष्ठ सदस्य पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाते हैं.
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